मंगलवार, 23 जून 2015

4=हायकू=राधिका


भीगे नयन
निहारि छटा कही 
राधिका बैन/ १
कान्हा के मन
राधिका बसत हैं
शृंगार बन …/ २
दिल तू राधा
झूठा यह संसार
लगत बाधा,,,३
रैन राधिका
कहते नयनन
दिल भाविका ४
श्याम राधिका
नाम राधिका तेरा
कान्हा प्रेमिका ५
नभ मे राधा
तन मे राधेश्याम
फिर क्यों व्याधा ,,,६
— राजकिशोर मिश्र [राज]

3=हायकू=कवि-कविता

हायकू
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कवि हृदय
रवि प्रकाश सम
हुआ उजाला
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देखि सुमन
गति कलियाँ चली
करने प्रेम
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घिरी बदरी
उमड़ि-उमड़ि के
बरसे नीर ,,,,
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कविता प्रिय
प्रियतम संदेश
है खुशहाली
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प्रथम घटा
घनघोर छोर न
. कवि कविता
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यथार्तबोध
का नित गुंजन
करे कविता
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कवि हृदय
तिमिर विनासक
जग प्रकाश
— राजकिशोर मिश्र [राज]

2=हायकू

हायकू
[१]
हे प्रियतम
आषाढ़ बरसत
वेदना देत /
[२]
ज्येष्ठ उमस,
तन मन झुलसे ,
विरहण सी  /
[३]
अमराई मे
शृंगार करे नित
कूके कोयल /
[४]
नैन आकुल
प्रियतम सनेह
कंपित गात/
[५]
विरहन के
अंगार सेज मन
ये कैसी वर्षा ?
राजकिशोर मिश्र राज

1=हायकू

हायकू
[१]
चलत   सखी
कह गयी   सयानी
बरसे पानी/
[२]
बादरिया   भी
हरस रही   राधा
मनमोहन/
[३]
 तूफ़ानी   दिल
मचल  रहा   मन
सावन   जैसा /
[४]

सावन  झूला
झूले सखियाँ सज
उड़े आकाश /
[५]
हे   घनघोर
घटा मचले  हिया
 छटा  निहार
राजकिशोर   मिश्र  राज