गुरुवार, 6 अगस्त 2015

6=आया बुढ़ापा

आया  बुढ़ापा
======1=======

चली   सजनी ,
नैना लगा कजरा,
 छाई  बदरी,
====2=====
मेघ  बरसे ,
सावन मे   फ़ुआर ,
ओढ़े   छतरी/
====3======
 करे गर्जन,
प्रचंड आकाश मे
 डरपे मन,
====4========

कास फूलत ,
 सकल  बदरिया ,
आया  बुढ़ापा /
====5======
हरित लता ,
 बिहसित सुमन ,
धरा जवानी /
=========

[5]हायकू = बारह मासा

卐 जय माँ शारदे 卐
हायकू = बारह मासा
=====[1]=========
चैत्र कृषक
अनाज प्राण सम
हर्षित मन/
====[2]=========
वैशाख मास
आताप विकराल
जरत धरा /
====[3]=========
ज्येष्ठ महीना
पवन बहत है
लौ विकराल /
====[4]========
आया अषाढ़
झूमि-झूमि बादल
बरसे पानी/
===[=5=]=======
सावन मेघ
व्योम मे सजधज
खेलत होली/
===[6]=========
भादों लावत
काली-काली बदरी
नाहि आघात /
===[7]========
क्वार विदाई
रिमझिम बारिस
फूलत कास/
====[8]========
कार्तिक कृषि
दीपावली मधुर
भरे उमंग /
====[9]======
अगहन जाड़ा
कदम धरत अब
ओढ़े रज़ाई/
=====[10]======
ठंड पौष की
लग रही कंपित
होत प्रभात /
==[11]=========
माघ मचाए
धूम कड़ाके ठंडी
चाहत आग/
===[12]=========
फागुन गुण
सब रंग रंगीला
आ खेलें होली /
============
राजकिशोर मिश्र”राज”
सर्वाधिकार   सुरक्षित

मंगलवार, 23 जून 2015

4=हायकू=राधिका


भीगे नयन
निहारि छटा कही 
राधिका बैन/ १
कान्हा के मन
राधिका बसत हैं
शृंगार बन …/ २
दिल तू राधा
झूठा यह संसार
लगत बाधा,,,३
रैन राधिका
कहते नयनन
दिल भाविका ४
श्याम राधिका
नाम राधिका तेरा
कान्हा प्रेमिका ५
नभ मे राधा
तन मे राधेश्याम
फिर क्यों व्याधा ,,,६
— राजकिशोर मिश्र [राज]

3=हायकू=कवि-कविता

हायकू
===========
कवि हृदय
रवि प्रकाश सम
हुआ उजाला
============
देखि सुमन
गति कलियाँ चली
करने प्रेम
===========
घिरी बदरी
उमड़ि-उमड़ि के
बरसे नीर ,,,,
=========
कविता प्रिय
प्रियतम संदेश
है खुशहाली
=============
प्रथम घटा
घनघोर छोर न
. कवि कविता
================
यथार्तबोध
का नित गुंजन
करे कविता
=================
कवि हृदय
तिमिर विनासक
जग प्रकाश
— राजकिशोर मिश्र [राज]

2=हायकू

हायकू
[१]
हे प्रियतम
आषाढ़ बरसत
वेदना देत /
[२]
ज्येष्ठ उमस,
तन मन झुलसे ,
विरहण सी  /
[३]
अमराई मे
शृंगार करे नित
कूके कोयल /
[४]
नैन आकुल
प्रियतम सनेह
कंपित गात/
[५]
विरहन के
अंगार सेज मन
ये कैसी वर्षा ?
राजकिशोर मिश्र राज

1=हायकू

हायकू
[१]
चलत   सखी
कह गयी   सयानी
बरसे पानी/
[२]
बादरिया   भी
हरस रही   राधा
मनमोहन/
[३]
 तूफ़ानी   दिल
मचल  रहा   मन
सावन   जैसा /
[४]

सावन  झूला
झूले सखियाँ सज
उड़े आकाश /
[५]
हे   घनघोर
घटा मचले  हिया
 छटा  निहार
राजकिशोर   मिश्र  राज